
लेखक
नवनाथ अर्जुन पाटिल गायकर
आहुर्ली, ता. ईगतपुरी, जि.नासिक
मो.नं.9881329709
हिंद ए वतन विश्वमे एक महान राष्ट्र की , धरोहर की महानतम पहचान है! इस धरती का ईतिहास विश्वमे सबसे पुराना और महान है!
भगवान श्रीकृष्ण कहते है कि घरती पर जब जब पाप का बोझ बढेगा,धर्म खतरेमे पड जायेगा,तब तब वो स्वंयम् या उनका अंश इस धरती पर पधारेगा, और बुराईयोको नष्ट करेगा!
इसनी सन सोलवी शताब्दी मे ऐसे ही एक महान सपुत ने इस मिठ्ठी मे जनम लिया, और बुराईयोका विनाश किया!इस राष्ट्र को, हिंदु सनातन धर्म को बचाया!
सोलहवी शताब्दी का वो दौर था!सोने की चिडीयॉ कहने वाले हिंदोस्थान को मुस्लिम आक्रांताओने पुरी तरह से लुटके उजाड दिया था!यहॉ के हिंदु राजा, प्रजा जात,पात मे बट चुकी थी!आपस मे ही लड रही थी!इसका लाभ उठाकर अरब,मंगोल,उझबेक , पर्शिया,तुर्क न जाने कहॉ कहॉ से, रेगिस्तान से मुस्लिम आक्रांता आये!उन्होने यहॉ कत्लेआम मचा दिया!सोने की चिडिया कहलानेवाला हिंदोस्थान तहस नहस कर दिया गया! हिंदु सनातन धर्म को मिटाने का वो दौर था! इस धर्म के लोगो को गुलाम से भी बदतर हालात मे जिंदगी का गुजर बसर करना पड रहा था!उनका धर्म खतरेमे था!उनकी धरोहर खतरेमे थी! वजुदही मिटनेवाला था!
हिंदु सनातन धर्म के लोग जो इन मुसलमान शासकोके तलवे चाट रहे थे,वो जैसे तैसे बचे थे!मगर बाकी की हिंदु प्रजा इन अत्याचारी शासकोके जुल्म तले दबे हुए थे!न उन्हे मंदिर बनाने की आजादी थी!न उन्हे तिलक लगाने कि,पुजा अर्चना या भजन किर्तन की आजादी थी!हिंदु होना ही उनके लिए बहोत बडा गुनाह था!ॉऔर अंजाम बहोत ही भयंकर था!
हिंदु होने पर कर देना पडता था!बच्चा हुआ, तीर्थयात्रा पे जाना हो तो भारी जुर्माना भरना पडता था!जिझिया जैसा अन्यायकारी कर था!
मुसलमान धर्म का आदमी हिंदुओकी बहु, बेटी, जमिन जायदाद कुछ भी हडप सकता था!मगर हिंदु न ही इसके खिलाफ बोल सकता था, या न ही इंन्साफ मॉंग सकता था!
आपस मे खुब लडनेवाले लाखो की तादात होने पर भी कायरोके भॉती जी रहे थे!और मुठ्ठीभर मुसलमान यहॉ के शासक बन चुके थे!
पुरी हिंदु रयत डर के मारे जी रही थी!यहॉ मुस्लिम शासक एक तो हिंदुओका धर्म परिवर्तन करते थे!या उन्हे पकडकर गुलाम बनाकर विदेशोमे बेचा जाता था!
हिंदु प्रजा तो बेसहारा थी!कोई भी आके उसका घर जला देता, खेत खलिहान लुट लेता! बहु, बेटीयोको अय्याशी के लिये भगाकर लिया जाता! वही गाय, बैल, भैस, बकरी को खाने के लिए चुरा लिया जाता था!
हिंदुओकी जिंदगी तो नर्क से भी बदतर थी!
यहॉ का हिंदु आपस मे बटकर या जयचंदो कि गद्दारीयोसे इन परदेशी आक्रमणकारी यो का गुलाम ही बन गया था!गधे और कुत्ते से बदतर हालात मे यहॉ का हिंदु जी रहा था! न उनका कोई वाली था,न कोई मसिहा था!
ऐसे स्थितीयोमे हिंदुओका जीना मुश्किल था,तो इसी वक्त महाराष्ट्र के पहाडी इलाकेमे एक शेर ने जनम लिया! मानो भगवान ने ही पाप के अंत के लिए अवतार लिया हो!
इस महापुरुष का नाम था शिवाजी शहाजी भोसले!एक कद्दावर जहागिरदार के यहॉ विपरीत हालात मे पुने के पास शिवनेरी किले पर राजा का जनम हुआ!किलेपे देवी मॉ शिवाई देवी का मंदिर था!तो उसी देवी मॉ के नाम पर बच्चे का नाम शिवाजी रखा गया!
पिता शहाजी भोसले उस वक्त विजापुर के आदिलशहा के सरदार थे!
जिन्होने कभी इन मुसलमानी शासकोके खिलाफ बगावत करके हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की थी!मगर जिस तरह से विजयनगर का वैभवशाली हिंदु साम्राज्य चारो और से आक्रमण करके मुस्लिम शासकोने खतम कर दिया था, ठिक उसी तरह से सरदार शहाजी भोसले की बगावत को भी सभी मुस्लिम शासकोने नष्ट कर दिया!इतना ही नही, आगे जाकर सल्तनत को कुछ खतरा न हो इसलिए शहाजी भोसले को मराठी मुलुख से ही हद्दपार किया,ता कि वो फिर बगावत न कर सके!और उन्हे कर्नाटक मे बंगलुर की जहागिर पर भेजा गया!
मगर वो शहाजी भोसले थे!अकबर के खिलाफ लडनेवाले शुर व महापराक्रमी महाराणा प्रताप के वंशज थे!मन मे स्वराज का सपना था!गुलामगिरी को तोडने का ख्वाब था!मगर सामने दुश्मन बडा था!
उन्होने आर्य चाणक्य की नीती अपनायी!खुद न सही लेकिन उन्होने अपनी बिवी जिजाबाई को अपने नन्हे पुत्र शिवबा के साथ मराठी मुलुख मे अपनी पुना जहागिरी के देखभाल के लिए भारी दलबल के साथ भेज दिया गया!और साथ मे कारभारी दादोजी कोंडदेव, कान्होजी जेधे, गोपिनाथ पंत बोकिल जैसे जानेमाने मुत्सद्दीओको भेजा गया!जो सभी स्वराज के राजा शहाजी के सपनो मे उनके साथ खडे थे!दिखावा जहागिर की देखभाल का था,मगर अंदर से बाल शिवबा के मन मे बगावत की चिंगारी भडकाने का और स्वराज कि स्थापना करने का ही था!
इस बगावत के लिए पहाडी मुलखोके मराठी प्रजा को साथ जोडना था,लढने के लिए एक ताकतवर सेना का निर्माण करना था!
मगर ये सब आर्य चाणक्य की नीती के अनुसार धीरे धीरे करना था!जिसकी भनक भी दुश्मनोको न लगे!
सातसौ साल से हिंदुस्थान की घरती को बाहरी मुसलमान लुट रहे थे!
शिवबा के मन मे पिता और मातोश्री जिजाबाई की और से पहले ही बगावत की बीजोको बोया गया था!
मुस्लिम शासकोने शहाजी राजा को खतम करनेका हर संभव प्रयास किया था!जब की उनके पिता मालोजी राजे, भाई शरिफजीने इन्ही सल्तनत के खातिर अपनी कुर्बानी दी थी!इन क्रुर शासकोने शहाजी राजा के एक चचेरे भाई खेळोजी राजे की बीवी को सरेआम उठवाया था, और अत्याचार करके उसे मुस्लिम बनाकर अपने जनाने मे शामिल किया था!राजे शहाजी इन सभी का प्रतिशोध लेने के लिए तडफ रहे थे!
वही मातोश्री जिजाबाई भी किसी सामान्य परिवार से नही थी!विजयनगर के वैभवशाली साम्राज्य की वो वंशज थी!जिनका साम्राज्य चारो और से घेरकर मुस्लिम शासकोने खतम कर दिया था!
सिंदखेड राजा के लखुजी राजे जाधव की वो कन्या थी! लखुजी जाधव एक कद्दावर मराठा सरदार थे!
मगर मुस्लिम शासकोके मन मे खौफ था,कि न जाने ये आगे जाकर बगावत करे!इसलिए उन्होने धोके से ही लखुजी राजे याने मातोश्री जिजाबाई का पुरा मायके का खानदान ही मुस्लिम शासकोने खतम कर दिया था!
उस वक्त के एक कद्दावर सरदार लखुजी राजे जाधव जो मातोश्री जिजाबाई के पिता थे, उनके पुरे परिवार के साथ ही खतम कर दिया गया था!और वो भी भरे दरबार मे,सरेआम कत्ल किया गया!
इन राक्षसोकी अत्याचार की कहानी बाल शिवबा सुनते और देख भी रहे थे!
बाल शिवबा ये सब देख रहे थे, सुन रहे थे!यहॉ कि हिंदु प्रजा की हालात को भी देख रहे थे!और तभी उन्होने ठान लिया था कि कुछ भी हो जाये, मगर इन अत्याचारो की गुलामी नही करनी है!बल्कि इनको परास्त करके यहॉ हिंदवी स्वराज कि स्थापना करने का निश्चय उन्होने किया!
पिता तो दुर थे, मगर मातोश्री जिजाबाई और दादोजी कोंडदेव के साथ साथ अन्य विश्वासु लोगो के साथ मिलकर उन्होने स्वराज के सपने को साकार करने के लिए धीरे धीरे आर्य चाणक्य की नीतीनुसार काम आरंभ किया!
मराठी मुलुख सहयाद्रीके पहाडी से घिरा हुआ दुर्गम इलाका था!यहॉ के लोग बडे ही हिंमतबहाद्दर थे!बाल शिवबा पुरे मुलुख मे घुमकर स्वराज कि चेतना हर मन मे, हर घर मे जगायी! हर जात, पंथ के लोगो को अपना किया!विश्वास दिया,उन्हे सुरक्षित करने का वादा किया! इन सबको इकठ्ठा किया!स्वराज कि फौज खडी की!जिसमे नेताजी पालकर, बाजी प्रभु देशपांडे, तानाजी मालुसरे, मुरारबाजी ऐसे बहोत सारे शुर यौद्धे साथ जुड गये!आगे चलकर इन वीरोने जो शहादत दी,जिससे वे इतिहास मे सदा सदा के लिए अमर हो गये!ये राजा का करिष्मा था!जिसने राष्ट्र और धर्म पर मर मिटनेवाले शुर पैदा किये थे!सोये हुए हिंदुओके मन मे एक चेतना जगाई थी!
राजा की पुने की जहागिर और आसपास का जो इलाका था,वो विजापुर के आदिलशहा की सल्तनत का हिस्सा था!लिहाजा शिवबा राजे की पहली भिड़ंत आदिलशहा से ही हो गयी!
शिवबा राजे ने बडे चालाकी से आदिलशहा का मुलुख कब्जेमे लिया! कही इलाके खाली पडे थे!कही पे उसका ध्यान नही था, तो कही पे उसकी सेना कमजोर
थी!खुद आदिलशहा इब्राहिम लंबे समय तक बिमार चल रहा था!
राजाने इसी मौकेका फायदा उठा लिया!और आदिलशाही मुल्क पर कब्जा जमाया! ये करते वक्त राजाने आस पडोस के वतनदार, देशमुख को भी स्वराज के काम मे शामिल किया!जिन्होने नही माना उन्हे साम,दाम,दंड और भेद नीतीका प्रयोग करके स्वराज मे शामिल किया! इस काम मे उन्होने अपने मामा को भी नही बख्शा!संभाजी मोहिता,जो सुपे परगणे को स्वराज मे शामिल करनेके खिलाफ था,उसे भी हराकर कैद कर लिया!
इसी तरह जावळी के खोरे पर भी राजाने चंद्रराव को हराकर कब्जा किया!
तोरणा किले पर अपने साथीयोके साथ मिलके राजाने स्वराज स्थापन करनेकी कसम ली!
तोरणा,राजगड जैसे अहम किलो पर राजाने कब्जा किया! धीरे धीरे पुना जहागिर के आस पडोस का मुल्क और गड किले राजाने हथियाये!
फिरंगोजी नरसाला जैसे पुराने वफादार लोग भी राजा के साथ आ गये!
स्वराज का दबदबा बढता गया!
जब आदिलशाही को ये बात समज आयी तबतक बहोत देर हो चुकी थी!उस वक्त इब्राहिम आदिलशहा मर चुका था!और उसका छोटा बच्चा सिकंदर अली अब आदिलशहा के गद्दी पे बैठा था!सब कारोभार उसकी मॉ याने बडी बेगम साहिबा संभाल रही थी!
उसने सबसे पहले तो फत्तेखान, रणदुल्ला खान जैसे कद्दावर सरदारोको शिवाजी महाराज के उपर हमला करने को भेजा!मगर जब वो हार कर लौटे तो अफजलखान जैसे दानव को बडी बेगम साहिबा ने शिवाजी राजा को खतम करने के लिए भेजा था!ये बहोत ही बडी चुनोती राजा के सामने थी!इस दानव को हराना बिलकुल नामुमकीन था!
मगर अपनी बडी चतुराई से राजाने अफजल जैसे दैत्य का वध किया,तो पुरा हिंदोस्थान थर्रा उठा!ये चमत्कार कैसे हुआ ?
क्यु की अफजल खान कोई आम सरदार नही था! विजापुर का आदिलशहा भी उससे डरता था!इतना ही नही तीन भाईयोको मारनेवाला, बाप को कैद करनेवाला हिंदोस्थान की सल्तनत का बादशहा बन बैठा गाजी आलमगीर औरंगजेब को भी इस अफजल ने हराया था!वो तो औरंगजेब की किस्मत अच्छी थी कि वो अफजल की चंगुल से जान बचाकर भाग निकला!
ऐसे रावण का खातमा करना बिलकुल असंभव था!मगर राजा ने ये काम करके दिखाया!अफजल के खातमे के बाद शिवाजी महाराज का धाक चारो और फैल गया!और स्वराज का विस्तार भी काफी बडा हो गया!
अफजल को मारने के बाद तो राजाके हौसले इतने बुलंद थे कि वो विजापुर के बाहर आ धमके थे! जिससे विजापुर की आदिलशाही ही खतम होने का डर पैदा हुआ था!
मगर एक ही जगह रुकना खतरेसे खाली था!आखिर राजा ने विजापुर को बख्श दिया,और वापस स्वराज की और निकल पडे!
अफजल का वध करने के बाद चंद दिनोमेही राजा ने आदिलशाही का आधे से ज्यादा मुल्क हासिल किया!
अफजल के वध के बाद कर्नुल का बगावतखोर सरदार सिद्दी जौहर को शिवाजी राजा का काम तमाम करने भेजा!
सिद्दी ने राजा पे धावा बोल दिया!उस वक्त राजा पन्हाला किले पर थे!तो सिद्दी ने वही पर ऱाजा को किलेके चारो और से घेर लिया!राजा पन्हाला किले पर ही अटक गये!
एक वक्त तो ऐसा लगा कि सिद्धी के कडे पंजेसे राजा अब छुट नही सकते!
मगर उसे भी चकमा देकर लाखो मुस्लिम सैनिको कां घेरा तोडकर महाराज वहॉ से निकल गये!
चंद मावलोके साथ पन्हाला से दौडकर विशालगड की और जानेवाले राजा को सिद्दी मसुद ने लगबग पकड ही लिया था!मगर राजा को वहॉ से रवाना करके बाजी प्रभु देशपांडे खुद उबंरखिंड के खिंड मे डटा रहा!और सिद्धी का रास्ता रोककर उसे खिंड पार ही करने न दी!इसमे सब तीनसौ मावले बाजी प्रभु के साथ शहिद हो गये, मगर राजा सुरक्षित किलेपर पहुचने तक दुश्मनोको रोक के रखा!
ये स्वराज के लिए अदभुत बलिदान की मिसाल थी!
इसके बाद तो विजापुर सल्तनत कमजोर ही होती गयी, और राजा शिवाजी अपना स्वराज का विस्तार बढाते चले गये!आदिलशहा के बाद कुतुबशहा को भी राजा ने अपना मजा चखाया!और थोडे ही पल मे पुना से लेकर कोकण तक और समुद्र पर भी अपना परचम लहराया!
अब दक्षिण पर विजय पाने के बाद राजा की भिड़ंत दिल्ली मे बैठे उत्तर दिशा के शासक,जो खुदको हिंदोस्थान का शहेनशहा मानता था,उस औरंगजेब से हो गयी!
औरंगजेब की सुरत को महाराज ने बदसुरत कर दिया!
बादशहा का मामा शाईस्ताखान जब राजा के स्वराज पे आया तो राजा ने लाखो सैनिको के बीच घुसकर उसपर धावा बोला!जान पे आफत आयी थी, मगर औरतो का बुरखा पहनकर शाईस्ता भाग निकला!मगर फिर हाथोकी चार उंगलीयॉ उसको गवानी पडी!
अपमानित होकर वो चला गया!
उसके बाद न जाने कितने सरदार दिल्ली से राजा के खिलाफ आ गये, और अपमानित होकर, चले गये! इसमे करतलबखान था, महाराजा जसवंतसिंह था, राणी रायबागान थी!
आखिरकार जब राजा के सामने कोई न टिका तो औरंग खुद जाने की तयारी करने लगा!तभी मिर्झा राजा जयसिंह ने जिम्मा संभाल लिया!
मिर्झा का दर्जा बादशहा के बराबर था!और वो पुराना सेनानी था!उसने राजा को इस तरह मजबुर किया कि राजा को आखिर दो कदम पिछे जाना ही पडा!
राजा ने औरंग से कुछ वक्त के लिए समजोता किया और दिल्ली दरबार मे हाजरी लगाना भी कुबुल किया!
औरंग का दरबार आग्रा मे लगा था!राजा शिवाजी महाराज उसके तख्त के सामने तो गये,मगर झुकने को साफ मना किया!
इस बात से गुस्साये औरंगजेब ने राजा को कैद कर लिया!अब राजा की जान को खतरा था!जिस औरंग ने खुद के भाई, बाप,भतीजे को खतम किया था,जिसने खुद के बेटे को बगावत करने पर नही बख्शा था!वो अब राजा को कहॉ छोडने वाला था!
मगर भगवान श्रीकृष्ण को जनम लेते ही जिस तरह से पिता वासुदेव ने कारागृह से बचाया था, उसी तरह राजा ने अनोखा दिमाग लगाकर उस कैद से पलायन किया, और औरंग हाथ मलता रहा!
आखिरकार महाराज ने तारो और अपना डंका बजाया! खतम हुए हिंदु के राज का आगाज किया!
राजा के इसी शौर्यगाथा से प्रेरित होकर बुंदेलखंड मे राजा छत्रसाल ने, जाट राजा गोकुलदास ने मथुरामे, पंजाब मे सिखोने, राजस्थान मे दुर्गादास राठौर जैसे राजपुतोने, आसाम मे लचिकेत बुडकान जैसे वीरोने बगावत का परचम लहराकर आगे चलकर औरंग के साम्राज्य का विनाश किया!
महाराष्ट्र मे राजा शिवाजी महाराज के जीवीत रहते हुए स्वराज को खतम करने की मंशा औरंग की पुरी न हो सकी! लेकिन राजा के मृत्यु के बाद भी लगबग तीस साल तक औरंग इस स्वराज को खतम करने के लिए लडता , झगडता रहा!मगर उसका सपना राजा शिव छत्रपती के मिठ्ठी मे चकनाचूर हो गया!और इसी मिठ्ठी मे तीस साल बाद राजा के पश्चात उन्ही मावलोने,मराठी सेना ने इस औरंग को गाड दिया, दफना दिया गया!
आखरी दम तक औरंग मराठी स्वराज को जीत नही पाया!ना राजा के होते हुए, न राजा के पश्चात भी!आखिर इसी मे औरंग और उसकी मोगली सल्तनत का भी अंत हो गया!
छत्रपती शिवाजी महाराज का इतिहास एक महान गाथा है! हिंदुओका एक महान स्वातंत्र्य युद्ध है!ऐसा महान राजा न तो इस जहॉ मे कही पैदा हुआ, न आगे जाकर पैदा होगा!
हमारी बदनसिबी ये कि इस महान राजा की मृत्यु सिर्फ पचास साल की आयु मे हो गयी!और भगवान उन्हे और वक्त देता तो आगे का इतिहास ही बदल जाता!
ऐसे विश्व वंदनीन, महनीय राजा शिव छत्रपती की शौर्यगाथा किसी अद्भुत चमत्कार से कम नही है!
आज राजा शिवाजी को ईश्वर का दर्जा प्राप्त हुआ है!
कवी भुषण कहता है कि, अगर शिवाजी न होता, तो काशी मक्का, मदिना होती!और हिंदु हिंदु न होते, सबकी सुन्नत होती!
इस महान राजा के लिए तो शब्द भी कम है;
ऐसे महान राजा को उनके जन्मदिन पर कोटी कोटी प्रणाम!
